रायबरेली-विकास की पोल खोलती तस्वीर, स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, प्रशासन की उदासीनता बनी 'काल'!

रायबरेली-विकास की पोल खोलती तस्वीर, स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, प्रशासन की उदासीनता बनी 'काल'!

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824

रायबरेली। विकास कार्ड ढिंढोरा पीटने वाले जनप्रतिनिधि जिला प्रशासन क्या किसी बड़े हादसे के इंतजार में है। जिले के ऊंचाहार तहसील क्षेत्र के अंतर्गत, विकास के दावों की खोलती हुई एक तस्वीर सामने आई है जो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े करती है। जान जोखिम में डालकर बच्चे अपने स्कूल तक किसी तरह से पहुंच रहे हैं जिसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है।बताते चलें कि जगतपुर ब्लॉक के सिंघापुर भटौली गांव में जिला प्रशासन की सुस्ती और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल है। शोभवा नाले पर बना पुल लंबे समय से टूटा-फूटा पड़ा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। जिससे मासूम स्कूली बच्चे और ग्रामीण रोज अपनी जान हथेली पर रखकर नाले को पार कर रहे है। गांव वासियों का रो-रोकर बयान है कि यह पुल सालों से ध्वस्त है। सरपंच से लेकर एसडीएम और जिलाधिकारी तक शिकायतें की गईं, प्रार्थना-पत्र दिए गए, लेकिन मिला सिर्फ खोखला आश्वासन! कोई ठोस कार्यवाही नहीं। बरसात में नाला उफान पर आ जाता है, पानी तेज बहता है। फिर भी बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं। या जान जोखिम में डालकर पार करते हैं। सर्दियों में घुटनों तक ठंडा पानी, फिसलन का डर, गिरने पर चोट लगने का खतरा यह सब रोज का रूटीन बन गया है। बच्चे एक-दूसरे का हाथ पकड़कर, सहारे से पार होते हैं। एक छोटी सी चूक और किसी की जान जा सकती है!स्कूली बच्चों ने कहा हम घुटनों तक पानी में उतरकर पार करते हैं। सर्दी में कंपकंपी छूटती है, फिसलने का डर रहता है। अगर कोई गिर गया तो घायल हो जाएगा या बह जाएगा। पढ़ाई भी अब मुश्किल हो गई है।महिलाओं को बाजार-खेत जाने में भी यही जद्दोजहद करनी पड़ती है। ग्रामीण चेतावनी दे रहे है।कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, किसी बच्चे या ग्रामीण की मौत हो सकती है। फिर भी प्रशासन सो रहा है!
जब ऊंचाहार एसडीएम राजेश श्रीवास्तव से बात की गई,तो उनका जवाब था फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है,लेकिन जांच करेंगे। जांच? आश्वासन? कितने सालों से यही सुना जा रहा है! क्या प्रशासन को तब तक इंतजार करना है जब तक कोई लाश न बिछ जाए?यह सिर्फ एक पुल का मामला नहीं यह गरीब गांवों में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ और प्रशासनिक अकर्मण्यता का जीता-जागता सबूत है। क्या जिलाधिकारी, एसडीएम और जनप्रतिनिधि अब भी चुप रहेंगे? क्या कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही नींद खुलेगी?