रायबरेली-डलमऊ ब्लॉक में रात के अंधेरे में बन रही इंटरलॉकिंग सड़क गुणवत्ता पर उठे सवाल
रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824
रात में बन रही इंटरलॉकिंग सड़क पर बवाल, ग्रामीणों ने रुकवाया काम; गुणवत्ता पर उठे सवाल
डलमऊ रायबरेली-विकासखंड डलमऊ की ग्राम सभा पचखरा भरसना में क्षेत्र पंचायत निधि से कराए जा रहे इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी, गुणवत्ता में कमी और रात के समय कार्य कराए जाने पर गंभीर सवाल उठाते हुए मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। मामले का वीडियो भी सामने आने के बाद ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब 198 मीटर लंबी इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा था। आरोप है कि सड़क की मजबूत नींव के लिए पर्याप्त गिट्टी नहीं डाली गई और कई स्थानों पर केवल मिट्टी के ऊपर ही इंटरलॉकिंग बिछाई जा रही थी। साथ ही सड़क की चौड़ाई भी कई जगह कम कर दी गई, जिससे भविष्य में आवागमन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव का मुख्य संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन करीब डेढ़ से दो हजार लोग गुजरते हैं। यही सड़क कुटिया चौराहा को घुरवारा मार्ग से जोड़ती है। ऐसे में यदि सड़क संकरी बनी तो बड़े वाहनों के आवागमन के दौरान बाइक और साइकिल सवारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीण निशांत, जयकरन, कमलेश कुमार, वीरेन्द्र कुमार, रमेश कुमार, रामशंकर और अमृत लाल सहित कई लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य रात के अंधेरे में इसलिए कराया जा रहा था ताकि गुणवत्ता की जांच और निगरानी से बचा जा सके। वीडियो सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है।
मामले में जब खंड विकास अधिकारी डलमऊ राम खेलावन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनकी जानकारी में नहीं था। उन्होंने बताया कि शिकायत की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं डलमऊ ब्लॉक प्रतिनिधि पंकज रावत ने कहा कि दिन में बारिश और तेज धूप के कारण कई बार ठेकेदार अपनी सुविधा के अनुसार रात में भी इंटरलॉकिंग का कार्य कराते हैं। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत मिली है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निर्माण कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप था तो उसे रात में कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या कार्य के दौरान संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारी या जूनियर इंजीनियर की निगरानी मौजूद थी? क्या सड़क की नींव में निर्धारित मात्रा में गिट्टी और अन्य सामग्री का प्रयोग किया गया? क्या गुणवत्ता की नियमित जांच हुई? ग्रामीणों के विरोध और वीडियो वायरल होने के बाद अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

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