रायबरेली-बछरावां सीएचसी में डॉक्टरों को गालियां देने का चल गया है चलन

रायबरेली-बछरावां सीएचसी में डॉक्टरों को गालियां देने का चल गया है चलन

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गाली-गलौज के चलते अच्छे डॉक्टर करा लेते हैं अपना स्थानांतरण


जो नहीं जाते उन्हें बनाया जाता है राजनीति का शिकार


लोगो की इस अराजकता का खामियाजा भुगतता है क्षेत्र का  आम नागरिक

रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647


बछरावां रायबरेली। स्थानीय कस्बे में संचालित उच्चीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंदर बीते कुछ वर्षों के दौरान डॉक्टरों तथा स्टाफ को गालियां देने का प्रचलन प्रारंभ हो गया है। प्राइवेट अस्पतालों में जब लोग अपना मरीज ले जाते हैं तो पैसा भी खर्च करते हैं और डॉक्टर के हाथ पैर भी जोड़ते हैं। परंतु सरकारी अस्पताल के अंदर भगवान का दूसरा स्वरूप जो डॉक्टर के रूप में होता है, उसे गालियां देना अपनी शान समझते हैं। यह लोग तो गालियां देकर चले जाते हैं, परंतु जब वही अच्छा डॉक्टर अपना स्थानांतरण करा लेता है तो तकलीफ क्षेत्र के लोगों को होती है। कुछ डॉक्टर तो राजनीति का शिकार करके यहां से हटा दिए गए, जैसे महिला डॉक्टर हुमा कौसर, पुरुष डॉक्टर गणनायक पांडे! इन डॉक्टरों के जाने का खामियाजा क्षेत्र की जनता भुगत रही है। जबकि मौजूदा समय में इसी अस्पताल के अंदर चल रहे महिला चिकित्सालय में लूट का तांडव मचा हुआ है, एक भी प्रसव बगैर पैसे लिए नहीं कराया जाता है, मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज महिला है, परंतु रात में कोई भी महिला डॉक्टर इस प्रसूति गृह में नहीं दिखाई देती। स्वयं इंचार्ज भी शाम होते ही लखनऊ के लिए रुखसत हो जाती है। परंतु किसी नेता नगरी की हिम्मत नहीं पड़ती कि वह इस महिला प्रसूति गृह के विरुद्ध कोई आवाज उठा सके। पुरुष चिकित्सालय में जो लोग खुद को दादा समझते हैं, वह भी उस तरफ का मुंह नहीं करते, क्योंकि डर रहता है कि कहीं अगर किसी ने कोई इल्जाम लगा दिया तो हालत खराब हो जाएगी। परंतु पुरुष चिकित्सालय में जहां 24 घंटे डॉक्टरों की मौजूदगी रहती है, वहां वह अपनी राजनीति दिखाने में खुद की शान समझते हैं। ऐसा ही एक वाक्या होली के दिन हुआ, लालगंज रेल कोच फैक्ट्री के पास रहने वाले कुछ लोग एक घायल दुर्घटनाग्रस्त मरीज को लेकर आए, मौके पर डॉक्टर प्रभात मिश्रा जो क्षेत्र की जनता में बहुत ही लोकप्रिय है क्षेत्र के लोग उन पर अटूट विश्वास करते हैं, हर समय सुलभ रहते हैं, जिस दिन उनकी ड्यूटी नहीं होती है, लोग फोन पर उनसे मशविरा कर लेते हैं, वह यथाशक्ति प्रत्येक व्यक्ति की मदद करने में आगे रहते हैं। वह ड्यूटी पर थे, उन्होंने घायल का इलाज किया और गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मरीज के साथ 15/ 20 लोग आए हुए थे, उन्होंने एंबुलेंस की मांग की, त्योहार के दिन अधिक दुर्घटनाओं के कारण तत्काल कोई एंबुलेंस मौजूद नहीं थी। डॉक्टर ने कहा कि या तो एंबुलेंस का इंतजार कर लीजिए, अन्यथा किसी भी साधन से मरीज को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाइये, उन लोगों को शायद यह भी नहीं मालूम था की एंबुलेंस का विभाग स्वास्थ्य विभाग के साथ जुड़ा तो जरूर है, मगर वह अस्पताल का अंग नहीं है। इसका संचालन लखनऊ से होता है, मरीज के साथ आए कुछ लोग अमादा गाली गलौज हो गए, एक साहबान तो यह भी पूछने लगे कि मरीज मर जाएगा, तो कौन जिम्मेदार होगा, उनकी इस वार्ता का तथा  अस्पताल के अंदर डॉक्टर के साथ हो रही गाली गलौज का वीडियो अस्पताल कर्मचारियों के पास सुरक्षित है। इस घटना के बाद डॉक्टर प्रभात मिश्रा ने कहा कि मैं अपना स्थानांतरण करवा लूंगा, बछरावां में बेइज्जती सहने के लिए नहीं आया हूं। सवाल यह उठता है कि बगैर सही जानकारी किसी एक चिकित्सक को बेइज्जत करने का अधिकार उन लोगों को किस कानून ने दे दिया है, जो खुद को बड़ा भारी नेता अथवा दादा समझते हैं। उन लोगों के द्वारा मचाए जा रहे तांडव से परेशान अस्पताल कर्मचारियों द्वारा पुलिस को सूचना देनी पड़ी। मौके पर जब पुलिस पहुंची तो वह सब के सब लोग मुकर गए कि घायल मरीज उनके साथ का है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब घायल मरीज उन लोगों के साथ नहीं था तो उन लोगों को विवाद करने की क्या आवश्यकता थी और यदि उस मरीज से सहानुभूति थी तो उसे जिला अस्पताल ले जाने की व्यवस्था उन लोगों के द्वारा क्यों नहीं की गई। बछरावां क्षेत्र के प्रबुद्ध वर्ग ने जिसने भी इस घटना को सुना उसने निंदा की है, क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बगैर वास्तविकता समझे बछरावां में तैनात किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा डॉक्टरो को अपमानित न किया जाए, अन्यथा क्षेत्र की जनता मुंहतोड़ जवाब देने पर विवश हो जाएगी।