भ्रष्टाचार की श्रृंखला में बछरावां बीईओ कार्यालय पर एक और गंभीर आरोप!

भ्रष्टाचार की श्रृंखला में बछरावां बीईओ कार्यालय पर एक और गंभीर आरोप!

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आदेशों के बावजूद नहीं जमा हुई ग्राम शिक्षा निधि की धनराशि


दो माह बाद भी नहीं शुरू हुई रामपुर एसएमसी खाते की जांच, अब तीन और विद्यालयों का मामला आया सामने

रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647

बछरावां रायबरेली। बिशुनपुर स्थित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्राथमिक विद्यालय रामपुर के एसएमसी खाते में जमा धनराशि के मामले में दो माह बीत जाने के बाद भी नामित जांच अधिकारी द्वारा जांच शुरू नहीं की गई है। इसी बीच कार्यालयीय भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शिथिलता का एक और गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़ौदा पूर्वी ग्रामीण बैंक, बछरावां द्वारा जारी सूची के क्रम में प्राथमिक विद्यालय मदार खेड़ा, मलकिया रानीखेड़ा तथा कंपोजिट विद्यालय असहन जगतपुर द्वारा ग्राम शिक्षा निधि खाते में जमा निष्प्रयोज्य धनराशि आज तक वापस नहीं कराई गई है। जबकि राज्य परियोजना कार्यालय एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा स्पष्ट आदेश (पत्रांक– जि०का०स०शि०अ०/2364/2018-19, वित्त/अप्रयुक्त धनराशि/541/2020-21, एस०एस०ए०/ 651-55/2020-21) जारी कर सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया था कि एसएमसी एवं ग्राम शिक्षा निधि खातों में जमा समस्त धनराशि तत्काल वापस जमा कराई जाए। साथ ही यह प्रमाण पत्र भी लिया जाना था कि इन खातों में किसी भी प्रकार की कोई धनराशि शेष नहीं है। इसके बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बछरावां की कथित लापरवाही एवं कमजोर प्रशासनिक नियंत्रण के कारण संबंधित विद्यालयों द्वारा उक्त धनराशि अब तक जमा नहीं कराई गई है और न ही धनराशि जमा न होने के कारणों से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। यह स्थिति न केवल उच्चाधिकारियों के आदेशों की खुली अवहेलना है, बल्कि संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो शिक्षा विभाग में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के और भी मामले सामने आते रहेंगे। क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों का यह भी कहना है कि पिछले कई महीनों से बीईओ कार्यालय बछरावां पर शिक्षकों एवं संगठनों द्वारा कई प्रमाणित साक्ष्यों के साथ आरोप लगाए जा रहे हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित साक्ष्यों सहित खबरों से भी यह प्रतीत होता है कि कार्यालय पर लगाए जा रहे आरोप गंभीर हैं, ऐसे में उनकी जांच क्यों नहीं कराई जा रही है, यह अपने आप में बड़ा प्रश्न है।
लोगों का कहना है कि क्या आदेश जारी होने के बावजूद जांच अधिकारी अपनी मनमानी कार्यप्रणाली से जांच को महीनों तक रोक सकते हैं? क्या ऐसे जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए, जिनके कारण निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी जांच शुरू नहीं हो पाई? यदि जांच करनी ही नहीं थी तो विभाग का इतना समय क्यों नष्ट किया गया और इसकी वजह से समाज में बेसिक शिक्षा विभाग की छवि भी प्रभावित हो रही है। सबसे गंभीर प्रश्न यह भी उठ रहा है कि ग्राम शिक्षा निधि एवं विद्यालय प्रबंध समिति के खातों में जमा निष्प्रयोज्य धनराशि की वापसी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वर्षों से जमा शासकीय धनराशि वापस न होने की सूचना उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं दी गई? क्या यह वित्तीय अनियमितता या संभावित भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ऐसे और कितने विद्यालय हैं, जहां की शासकीय धनराशि अब भी वापस नहीं कराई गई है और इस पूरी स्थिति का जिम्मेदार आखिर कौन है?