रायबरेली- मानदेय और सम्मान की जंग: ऊंचाहार में आशा बहुओं का अनिश्चितकालीन धरना जारी ?

रायबरेली- मानदेय और सम्मान की जंग: ऊंचाहार में आशा बहुओं का अनिश्चितकालीन धरना जारी ?

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रिपोर्ट- सागर तिवारी

ऊंचाहार (रायबरेली): प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा बहुओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। शुक्रवार को ऊंचाहार में सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं ने तहसील और कस्बे के विभिन्न हिस्सों में विरोध रैली निकाली और कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गईं।15 दिसंबर से जारी है आक्रोश हड़ताल का नेतृत्व कर रही जिला अध्यक्ष गीता मिश्रा ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "हम 15 दिसंबर से हड़ताल पर हैं। 18 दिसंबर को लखनऊ में विधानसभा घेराव के दौरान सरकार ने तीन दिन का समय मांगा था, लेकिन आज 2 जनवरी हो गई और सरकार की ओर से कोई सकारात्मक संदेश नहीं आया है। उपमुख्यमंत्री के कथित बयान पर नाराजगी
धरना प्रदर्शन के दौरान आशा बहुओं में सरकार के रुख को लेकर गहरा आक्रोश दिखा। गीता मिश्रा ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर हमें पति की ही कमाई पर निर्भर रहना होता, तो हम 24 घंटे जनमानस की सेवा क्यों करते? हम अपनी मेहनत की मजदूरी मांग रहे हैं, कोई भीख नहीं। सरकार हमसे 24 घंटे काम लेती है, फिर हमें बच्चों की फीस के लिए दूसरों का मुंह क्यों देखना पड़े?"
प्रमुख मांगें और कार्य बहिष्कार का ऐलान।आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे टीकाकरण, स्वास्थ्य बैठकों और आयुष्मान कार्ड जैसे सभी सरकारी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करेंगी। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:राज्य कर्मचारी का दर्जा: आशा बहुओं को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए।निश्चित मानदेय: सम्मानजनक और निश्चित मासिक वेतन निर्धारित हो।बीमा और सुरक्षा: ड्यूटी के दौरान दुर्घटना का शिकार होने वाली बहनों के लिए पुख्ता बीमा और परिवार को एकमुश्त आर्थिक सहायता मिले।
मातृत्व अवकाश: महिला कर्मचारी होने के नाते मातृत्व अवकाश की सुविधा मिले।
बकाया भुगतान: आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी और अन्य लंबित भुगतानों का तत्काल निपटारा हो।

- सम्मान की लड़ाई

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने परिवार और बच्चों को छोड़कर समाज की सेवा में तत्पर रहती हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल अपमान और अल्प मानदेय मिल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।