रायबरेली-गांवों में विकास के नाम पर खर्च हुए 12 करोड़, ऑडिट में अभिलेख गायब
रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824
ऑडिट में नहीं मिले भुगतान से जुड़े अभिलेख, एक सप्ताह में दस्तावेज पेश करने का अल्टीमेटम
रायबरेली-गांवों में कराए गए विकास कार्यों के भुगतान से जुड़े अभिलेखों का हिसाब नहीं मिलने पर 55 पूर्व ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी किया गया है। जिला पंचायत राज विभाग की ओर से कराए गए ऑडिट में करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि से कराए गए विकास कार्यों के दस्तावेज नहीं मिलने का मामला सामने आया है। ऑडिट रिपोर्ट में सरकारी धनराशि के खर्च में अनियमितता की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने संबंधित पूर्व प्रधानों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जरूरी अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2019-20 में जिले के विभिन्न विकास खंडों की 55 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए गए थे। इन कार्यों पर खर्च की गई धनराशि का सत्यापन करने के लिए जिला पंचायत राज विभाग की ओर से पिछले वर्ष ऑडिट कराया गया था। ऑडिट के दौरान कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों से संबंधित भुगतान के अभिलेख उपलब्ध नहीं हो सके। इसके बाद संबंधित पूर्व ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई है।
कई ग्राम पंचायतों में लाखों के कार्यों का नहीं मिला हिसाब
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, छतोह विकास खंड की पदुमपुर ग्राम पंचायत में 29 लाख 17 हजार 463 रुपये के विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख नहीं मिले। वहीं, लालगंज के कुम्हरौरा गांव में 21 लाख 43 हजार 677 रुपये और हरचंदपुर के डिघौरा सोममऊ गांव में 32 लाख 57 हजार 933 रुपये के विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सके। हरचंदपुर के बाला गांव में भी 22 लाख 21 हजार 347 रुपये के विकास कार्यों के अभिलेख नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा छतोह के बेढ़ौना गांव में 34 लाख 34 हजार रुपये के विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख ऑडिट टीम को नहीं मिले।
अमावां के सबसे ज्यादा गांव जांच के दायरे में
ऑडिट में जिले के कई विकास खंडों की ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें अमावां की सर्वाधिक 10 ग्राम पंचायतें, छतोह की नौ और राही की छह ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा सतांव, जगतपुर और सलोन की चार-चार, ऊंचाहार और हरचंदपुर की तीन-तीन तथा सरेनी, बछरावां, शिवगढ़, महराजगंज और लालगंज की दो-दो ग्राम पंचायतें जांच के दायरे में हैं। वहीं, डीह और खीरों विकास खंड की एक-एक ग्राम पंचायत भी सूची में शामिल है।
एक सप्ताह में देना होगा जवाब
जिला पंचायत राज अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि ऑडिट रिपोर्ट में करीब 12 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि के खर्च में अनियमितता की आशंका जताई गई है। संबंधित 55 पूर्व ग्राम प्रधानों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर विकास कार्यों और भुगतान से जुड़े आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने का समय दिया गया है। अभिलेखों के परीक्षण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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