रायबरेली:ऊंचाहार नगर पंचायत में विकास के दावे सिर्फ होर्डिंग्स और कागजों तक सीमित जाने क्या है पूरा मामला❓

रायबरेली:ऊंचाहार नगर पंचायत में विकास के दावे सिर्फ होर्डिंग्स और कागजों तक सीमित जाने क्या है पूरा मामला❓

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रिपोर्ट- सागर तिवारी

ऊंचाहार/रायबरेली: नगर पंचायत में विकास के दावे सिर्फ होर्डिंग्स और कागजों तक सीमित रह गए हैं। हकीकत यह है कि पूरा नगर पंचायत प्रशासन भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुका है और आम जनता गंदगी, बदबू और बीमारियों के बीच घुट-घुट कर जीने को मजबूर है। नगर पंचायत के जिम्मेदारों की उदासीनता और लूट-खसोट की नीति ने ऊंचाहार की सूरत बिगाड़ कर रख दी है।
40 लाख पानी में, नालियां बनीं शो-पीस
भ्रष्टाचार का सबसे ताजा और जीता-जागता सबूत मंजहरगंज मोहल्ला है। यहाँ नगर पंचायत ने जनता की गाढ़ी कमाई के करीब 40 लाख रुपये नाली और इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण के नाम पर खर्च तो कर दिए, लेकिन धरातल पर गुणवत्ता शून्य है। निर्माण कार्य होते ही नालियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं। जो नालियां पानी निकासी के लिए बनी थीं, वे अब खुद अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। नालियों का कोई उपयोग नहीं है। उनमें घास उग गई हैं जिनमें मच्छरों का पहरा रहता है। कई अन्य मोहल्लों में गंदे पानी और कीचड़ से नालियां बजबजा रही हैं। न पानी निकलने का रास्ता है और न ही सुनवाई का कोई ठिकाना। 

नगर पंचायत कागजों पर प्रतिमाह सरकारी कोष से लाखों रुपए खर्च करती है । लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कागजों से जुदा है। मोहल्लों में गन्दगी, बजबजाती नालियां, इधर उधर फैला कूड़ा ऊंचाहार नगर पंचायत की शान बन गया है। ये कहां और की तस्वीर नहीं अपितु वीआईपी जिले के ऊंचाहार नगर पंचायत की है। इससे यह स्पष्ट है कि सरकारी की महत्वाकांक्षी योजना को नगर पंचायत के जिम्मेदार ठेंगा दिखा कर मलाई काट रहे हैं। 
वहीं सफाई व्यवस्था की पोल खोलता सराय मोहल्ला स्थित गंदा नाला अब नगर पंचायत का अनौपचारिक 'डंपिंग यार्ड' बन चुका है। स्थानीय निवासी गुड़िया कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था करने के बजाय नगर का सारा कचरा इसी नाले में फेंका जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि इससे उठने वाली असहनीय दुर्गंध और प्रदूषण ने पास की आबादी का जीना मुहाल कर दिया है। लोग कचरे के पास से नाक पर रुमाल रखकर निकलने को विवश हैं और संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। इसी रास्ते से नवापारा कजराबाद, मास्टरगंज़ मोहल्ला समेत कई गांव के लोग गुजरते हैं। लाखों की लागत से बने सार्वजनिक शौचालय भी ताले में बंद होकर 'सफेद हाथी' साबित हो रहे हैं।
नगर पंचायत में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यहाँ सफाई कर्मी भी सिर्फ फाइलों में झाड़ू लगा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कागजों पर सफाई कर्मियों की फौज तैनात है, लेकिन धरातल पर सफाई नदारद है। इन 'कागजी कर्मचारियों' के नाम पर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान निकाला जा रहा है, जिसे नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मिल-बांटकर डकार रहे हैं।
जनता त्रस्त है और प्रशासन मस्त है। ऊंचाहार की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ यह खिलवाड़ चलता रहेगा? क्या उच्च अधिकारी इस खुली लूट की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे या फिर यह बंदरबांट यूं ही जारी रहेगी?