अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बालिकाओं ने भरी सपनों की उड़ान, पेड़ की शाखाओं पर उकेरीं भविष्य की आकांक्षाए

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बालिकाओं ने भरी सपनों की उड़ान, पेड़ की शाखाओं पर उकेरीं भविष्य की आकांक्षाए

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रिपोर्ट - अमन श्रीवास्तव 
मो - 8052996633

रायबरेली: बालिकाओं के सपनों को पहचान देने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उन्हें अपने भविष्य के प्रति आत्मविश्वास से भरने के उद्देश्य से सबला संस्था द्वारा संचालित समर्थ विस्तार परियोजना के अंतर्गत टीम लीडर  शुभा जी व  राजेंद्र जी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम मुबारकपुर ,मोहम्मद मऊ,गुलूपुर , ओदर,पूरे हुली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी कल्पनाओं, रुचियों तथा भविष्य में कुछ बनने की आकांक्षाओं को खुलकर साझा किया।

एनिमेटर सज्जन, ज्योति ममता सुनैना ने कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा, समान अवसर, सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मनिर्भरता के महत्व से परिचित कराना तथा उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करना रहा।

सपनों के पेड़ पर बालिकाओं ने लिखी अपने भविष्य की कहानी

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘गर्ल्स ड्रीम्स (बालिकाओं के सपने)’ गतिविधि रही। इस गतिविधि में बालिकाओं ने मिलकर एक पेड़ की आकृति बनाई। पेड़ की शाखाओं और पत्तियों पर उन्होंने अपने नाम तथा भविष्य में बनने की इच्छा वाले व्यवसायों को लिखा।

किसी बालिका ने शिक्षक बनकर बच्चों को शिक्षित करने का सपना साझा किया, तो किसी ने डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने की इच्छा जताई। वहीं, कुछ बालिकाओं ने पुलिस अधिकारी बनने और अन्य क्षेत्रों में अपना करियर बनाने की आकांक्षा व्यक्त की।

इस गतिविधि ने बालिकाओं को यह सोचने और समझने का अवसर दिया कि प्रत्येक बालिका की अपनी पहचान, अपनी रुचि और अपने सपने होते हैं। उनके सपनों को पूरा करने के लिए परिवार एवं समाज का सहयोग, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सही मार्गदर्शन और स्वयं पर विश्वास बेहद महत्वपूर्ण हैं।

अधिकारों की समझ से मजबूत होगा बालिकाओं का भविष्य

कार्यक्रम के दौरान कोऑर्डिनेटर दीपांजलि काउंसलर दीपिका केसवर्कर अलका ने अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के उद्देश्य एवं महत्व पर चर्चा की गई। बालिकाओं को शिक्षा के अधिकार, लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसरों के बारे में जानकारी दी गई।
 कार्यक्रम में कुछ किशोरियों ने अपनी बातों को साझा किया, जैसे - आरती ने बताया कि बैठकों में आने से मेरे अंदर यह बदलाव आया है कि मैं अब बोलने लगी हूं वरना कोई भी व्यक्ति गांव में आता था या घर में आता था तो मैं कुछ भी नहीं बोलती थी।
 पूरे कुटी की अनन्या ने बताया कि पहले हम कभी-कभी स्कूल जाते थे लेकिन दीदी के समझाने के बाद रोज जाते हैं जिससे अब पढ़ने में मन लगता है।

उन्हें बताया गया कि बालिकाओं को भी अपनी प्रतिभा विकसित करने, अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपने भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। किसी भी बालिका के सपनों को केवल लिंग के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

खेल एवं समूह गतिविधियों से बढ़ा आत्मविश्वास

कार्यक्रम में विभिन्न खेलों एवं समूह गतिविधियों के माध्यम से बालिकाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई। इन गतिविधियों के जरिए उन्हें अपने विचार व्यक्त करने, एक-दूसरे की बात सुनने और सामूहिक रूप से सीखने का अवसर मिला।

बालिकाओं ने अपनी क्षमताओं एवं भविष्य की योजनाओं पर विचार साझा किए। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा एक-दूसरे के सपनों को प्रोत्साहित करने की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बालिकाओं को केवल सपने देखने के लिए ही नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक अवसर, शिक्षा, प्रोत्साहन और सहयोग भी मिलना चाहिए। जब बालिकाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तो वे न केवल अपना भविष्य संवारती हैं, बल्कि परिवार, समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

कार्यक्रम का समापन बालिकाओं को अपने लक्ष्य निर्धारित करने, शिक्षा जारी रखने और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की दिशा में निरंतर प्रयास करने के संदेश के साथ हुआ।

सपने देखेंगे, सपने सजाएँगे, शिक्षा और आत्मविश्वास से अपनी पहचान बनाएँगे। हर बालिका को मिले समान अवसर, तभी रोशन होगा उसका भविष्य।
 इस प्रकार के स्लोगन व नारों के साथ कार्यक्रम में रिफ्रेशमेंट देकर धन्यवाद के साथ कार्यक्रम को समाप्त किया गया ।