तेजाब से पेट का रास्ता हुआ बंद, एम्स रायबरेली के डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से बनाया खाने का रास्ता

तेजाब से पेट का रास्ता हुआ बंद, एम्स रायबरेली के डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से बनाया खाने का रास्ता

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)

मो-8573856824


चार महीने बाद युवक ने दोबारा मुंह से खाया खाना, जटिल सर्जरी से परिवार को मिली बड़ी राहत

रायबरेली-तेजाब पीने के बाद पेट के निचले हिस्से में गंभीर सिकुड़न के कारण करीब चार महीने से मुंह से खाना खाने में असमर्थ 16 वर्षीय युवक का एम्स रायबरेली के डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर नया जीवन दिया है। जनरल सर्जरी विभाग की यूनिट-1 ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक यानी दूरबीन विधि से पेट को छोटी आंत से जोड़कर खाने का रास्ता तैयार किया। ऑपरेशन के बाद अब युवक सामान्य रूप से मुंह से खाना खा पा रहा है और उसका वजन भी बढ़ रहा है।
ऊंचाहार क्षेत्र के मुरार मऊ गांव निवासी 16 वर्षीय सूर्यांश ने करीब चार महीने पहले तेजाब पी लिया था। तेजाब के कारण उसके पेट के निचले हिस्से में गंभीर सिकुड़न हो गई थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि भोजन पेट से आगे नहीं जा पा रहा था और युवक के लिए मुंह से खाना खाना लगभग असंभव हो गया था। इसके बाद उसे एक पाइप के माध्यम से सीधे छोटी आंत में भोजन दिया जा रहा था।
इस स्थिति के चलते युवक और उसका परिवार पिछले कई महीनों से शारीरिक और मानसिक परेशानी से गुजर रहा था। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता यही थी कि आखिर कब उनका बच्चा दोबारा सामान्य तरीके से खाना खा सकेगा।
27 जुलाई 2026 को एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग की यूनिट-1 ने युवक की जटिल सर्जरी की। डॉक्टरों की टीम ने लैप्रोस्कोपिक यानी की-होल तकनीक से पेट को छोटी आंत से जोड़ने का ऑपरेशन किया। सर्जरी के बाद भोजन के आगे जाने का रास्ता तैयार हो गया और युवक धीरे-धीरे सामान्य भोजन लेने में सक्षम हो गया।
ऑपरेशन के बाद युवक के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। अब वह मुंह से खाना खा रहा है और उसे भोजन करने में कोई विशेष परेशानी नहीं हो रही है। उसका वजन भी उचित रूप से बढ़ रहा है। सफल उपचार के बाद सूर्यांश और उसके परिवार ने राहत की सांस ली है।
डॉक्टरों की टीम ने निभाई अहम भूमिका
एम्स रायबरेली की निदेशक डॉ. अमिता जैन ने इस जटिल सर्जरी की सफलता पर जनरल सर्जरी यूनिट-1 की टीम की सराहना की। उन्होंने डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में पूरी टीम को बधाई दी।
ऑपरेशन में डॉ. प्रणभ कुशवाहा, डॉ. अमृतांशु सौरभ और डॉ. शिरीष कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं डॉ. योगेश (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. हिमांशु (जूनियर रेजिडेंट) ने भी उपचार में योगदान दिया।
सर्जरी को सफल बनाने में एनेस्थीसिया टीम के डॉ. गिरीश, डॉ. अंजू (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. देवी (जूनियर रेजिडेंट) की भी अहम भूमिका रही। इसके अलावा नर्सिंग ऑफिसर सुप्रिया और प्रिया ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
एम्स निदेशक डॉ. अमिता जैन ने पूरी टीम के समर्पण, मेहनत और बेहतर टीमवर्क की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान का जनरल सर्जरी विभाग आधुनिक दूरबीन तकनीक के माध्यम से भविष्य में भी जटिल सर्जरी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि एम्स रायबरेली का उद्देश्य रायबरेली और आसपास के मरीजों को उनके घर के नजदीक ही आधुनिक और बेहतर सर्जिकल उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को दूर-दराज के बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।