रायबरेली- ऊंचाहार रैन बसेरा बनाकर खानापूर्ति आखिर क्यों जिम्मेदारों फेरा मुह ?

रायबरेली- ऊंचाहार रैन बसेरा बनाकर खानापूर्ति आखिर क्यों जिम्मेदारों फेरा मुह ?

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रिपोर्ट- सागर तिवारी 

ऊंचाहार/रायबरेली- अस्थाई बस स्टॉप पर रैन बसेरा बनाकर खानापूर्ति की गई है। रैन बसेरा में रुकने वाले लोगों को खाने पीने समेत पर्याप्त सुविधा भी नहीं मिल रही है। वही अगर पंचायत के  द्वारा रेलवे स्टेशन, सीएचसी व नगर पंचायत में इस साल रैन बसेरा का निर्माण नहीं कराया गया है। जिससे सफर करने वाले लोगों को इस ठंड भरी रात में ठिठुरने को विवश हैं।
                नगर पंचायत द्वारा नगर के अस्थाई बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए साधन के इंतजार के लिए बनाए गए टीन शेड के नीचे दोनों तरफ से खुले स्थान पर टेंट की चार पाई व बिस्तर लगाकर रैन बसेरा का रूप दिया गया है। हालांकि दोनों तरफ खुली जगह को रात में तिरपाल लगाकर ढक दिया जाता है। जिससे हवा न लगे। लेकिन स्थानीय लोगों की माने तो कभी कभी जगह कम पड़ जाती है। कभी कभार ही लोग उसमें रुकते हैं। रुके हुए मुसाफिरो को भी खान पान की समुचित व्यवस्था नहीं है। जलाव के नाम पर एक बड़ा सा लकड़ी का बोटा डाल दिया गया है। जिसे शाम को नगर पंचायत कर्मियों द्वारा जलाकर छोड़ दिया जाता है। जो थोड़ी ही देर में बुझ जाता है। वही ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को रात्रि विश्राम के लिए ठंड से बचाव के कोई इंतजाम नहीं है। यहां तक कि न अलाव की व्यवस्था है। और न ही रैन बसेरा बनाया गया है। जिससे यात्री ठंड में ठिठुरते हुए रात गुजारने को मजबूर हैं। इसी तरह सीएचसी में भी भर्ती मरीज के तीमारदारों के लिए रात गुजारने के लिए जलाए गए अलाव के सहारे ही रात काटनी पड़ती है। क्योंकि रैन बसेरा की व्यवस्था नहीं है। जबकि इसके पहले नगर पंचायत में भी रैन बसेरा का निर्माण कराया जाता था। जिससे रात रुकने वाले लोगों को ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाती थी । वही रात रुकने वाले लोगों को चाय पानी के साथ ही भोजन की व्यवस्था भी की जाती थी। वही इस बाबत नगर पंचायत अध्यक्ष ममता जायसवाल के पति व प्रतिनिध कृष्ण चंद्र जायसवाल का कहना है। किनगर पंचायत के द्वारा बस स्टॉप पर रैन बसेरे का निर्माण कराया गया है। वहां पर रुकने वाले लोगों को भोजन पानी चाय समेत जरूरत की समान उपलब्ध कराया जाता है। ठंड से बचाव के लिए रैन बसेरा में पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। नगर पंचायत का एक आदमी हमेशा तैनात रहता है। जो मुसाफिरों की सुविधा का ख्याल रखता है।