रायबरेली-विगत 16 अप्रैल से कार्य से विरत है पंचायती विभाग के संविदा कर्मी
रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647
बछरावां रायबरेली। सरकार द्वारा पिछले लगभग 5 महीने से मानदेय न दिए जाने तथा मजदूरों का पैसा न दिए जाने से आक्रोशित पंचायती विभाग के संविदा कर्मी, जिसमें रोजगार सेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी सहायक, लेखाकार ईपीओ शामिल है, वह प्रदेश व्यापी कार्य बहिष्कार पर चल रहे हैं। इन कर्मचारियों में कार्य बहिष्कार पर चल रहे रोजगार सेवकों ने बताया की मौजूदा केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा मनरेगा राज्य वित्त तथा केंद्रीय वित्त के द्वारा ग्राम सभा में जो भी कार्य कराए गए हैं, उसमे मजदूरो का भुगतान नहीं भेजा जा रहा है। जिसके चलते गांव में उनका जीना दूभर हो रहा है। क्योंकि गांव का मजदूर यह नहीं जानता कि सरकार की नीतियां क्या है, सरकार पैसा क्यों नहीं दे रही है, क्योंकि वह लोग ही मजदूरों को बुलाकर लाते हैं, इसलिए गांव का मजदूर अपनी मजदूरी की मांग भी उन्ही से करता है। सरकार द्वारा लगाए गए सारे नियमों का वह लोग पूरी तरह पालन करते हैं। दिन में दो बार काम करते हुए मजदूरों का फोटो उनके नाम कार्य की प्रगति आदि भेजते रहते हैं। अगर इसमें जरा सा भी किसी रोजगार सेवक से चूक हो जाती है, तो उसे नौकरी से बाहर करने की धमकी भी दी जाती है। परंतु हालात यह है कि मजदूरों का पैसा तो दूर 5 महीने से इन संविदा कर्मचारियों का मानदेय नहीं दिया गया, इन कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के द्वारा इतना कम पारिश्रमिक दिया जाता है कि उसमें उनका परिवार भरपेट भोजन भी नहीं कर पाता। किसी तरह वह लोग अपने परिवार के साथ गुजर बसर करते हैं। इतना कम मान देय देने के बाद भी सरकार समय से पैसा नहीं देती एक रोजगार सेवक ने बताया कि उसे कहने को तो ₹10000 मानदेय मिलता है, परंतु उसके हाथ में 7780 रुपए ही आते हैं। तकनीकी सहायक को लगभग 14000 रुपए वेतन मिलता है, जो आज के महंगाई के युग में ऊंट के मुंह में जीरा साबित होता है। सवाल यह उठता है की मौजूदा सरकार दावे तो बड़े-बड़े करती है, परंतु धरातल पर उसकी कथनी और करनी में कितना अंतर है। यह इन कर्मचारियों को मिलने वाले मानदेय में देखा जा सकता है।

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