रायबरेली-एम्स रायबरेली में सैंगर सीक्वेंसिंग पर हैंड्स-ऑन कार्यशाला संपन्न

रायबरेली-एम्स रायबरेली में सैंगर सीक्वेंसिंग पर हैंड्स-ऑन कार्यशाला संपन्न

-:विज्ञापन:-

रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली के वीआरडीएल एवं एमआरयू (आईसीएमआर-डीएचआर) अनुभाग द्वारा सैंगर सीक्वेंसिंग पर 20 से 21 फरवरी तक दो दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न किया गया। सैंगर सीक्वेंसिंग डीएनए सीक्वेंसिंग की एक तकनीक है। कार्यशाला का उद्देश्य व्यावहारिक व कौशल-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से आणविक निदान एवं अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करना रहा।
देश के विभिन्न हिस्सों से आए विविध विज्ञान पृष्ठभूमि वाले 50 से अधिक स्नातकोत्तर प्रतिभागियों को संवादात्मक सत्रों एवं मार्गदर्शित प्रदर्शनों के माध्यम से सैंगर सीक्वेंसिंग की संपूर्ण प्रक्रिया तथा डेटा विश्लेषण का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने कहा कि ऐसी क्षमता-वर्धन पहलें संस्थानों में उच्च गुणवत्ता वाली सीक्वेंसिंग क्षमता विकसित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, जिससे सटीक निदान, रोग निगरानी (सर्विलांस) तथा प्रभावी शोध को गति मिलती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संरचित हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण उन्नत तकनीकों को नियमित प्रयोगशाला दक्षता में बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
उद्घाटन सत्र में प्रो. (डॉ.) नीरज कुमारी (डीन, अकादमिक), प्रो. (डॉ.) अर्चना वर्मा (डीन, रिसर्च), डॉ. रेखा पई (सीएमसी वेल्लोर), डॉ. शेफाली गुप्ता (एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी) तथा डॉ. सना इस्लाही (एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी) उपस्थित रहीं।
प्रतिभागियों में सहभागिता और सहकर्मी-अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए पहले दिन रोचक एवं सहभागितापूर्ण गतिविधियां आयोजित की गईं। दूसरे दिन डॉ. सोनालिका महाजन, सीनियर साइंटिस्ट, आईसीएआर-आईवीआरआई, बरेली ने सैंगर सीक्वेंसिंग के परिणामों की व्याख्या (इंटरप्रिटेशन) से जुड़े व्यावहारिक सुझाव साझा किए, जिससे प्रतिभागियों को क्रोमैटोग्राम व्याख्या और परिणाम सत्यापन की महत्वपूर्ण बारीकियों की समझ विकसित हुई।