जन्म के बाद बेटी को खेत में फेंका, सहारा देने के लिए सामने आई 'यशोदा'; जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही मासूम
रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824
रायबरेली-माता कुमाता न भवति...श्लोंकों में तो माता की यही पहचान है। लेकिन, अब मायने बदल रहे हैं। इसके पीछे चाहे सामाजिक पतन मानें या फिर लोकलाज। रविवार की सुबह एक खेत में नवजात बच्ची को कोई मां तड़पती छोड़ गई
मासूम की चीख सुनकर एक महिला उसे आंचल में भर कर जिला अस्पताल ले आई, जहां बच्ची का इलाज किया जा रहा है।
मामला मिल एरिया के हरदासपुर का है। यहां के एक खेत में सुबह-सुबह नवजात को लोगों ने तड़पते देखा। गांव में सूचना पहुंची। मौके पर भीड़ जुट गई। तमाशबीन मोबाइल में वीडियो बनाने लगे। इसी दौरान एक महिला ने अपने आंचल में उस बच्ची को भर लिया। लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची एंबुलेंस में वह महिला बच्ची को लेकर बैठ गई।
एंबुलेंस में किया प्राथमिक उपचार
एंबुलेंस में ही प्राथमिक उपचार किया जाने लगा। पहले नवजात का आक्सीजन लेबल जांचा गया, फिर उसे आक्सीजन मास्क लगाया गया। गांव वालों का कहना था कि लोकलाज के चलते कोई इस बच्ची को खेत में फेक गया है। मामले में बाल कल्याण समिति के सदस्य मिलिंद द्विवेदी ने बताया कि किसी महिला द्वारा पुलिस को सूचना दी गई थी। बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसे वार्मर आक्सीजन मशीन पर रखा गया है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
अस्पताल कर्मियों ने जताई ये आशंका
वहीं, अस्पताल कर्मियों द्वारा बच्ची के कुछ घंटे पूर्व ही जन्म लेने की आशंका जताई जा रही है। उसका वजन एक किलो चार सौ पचास ग्राम है। प्रभारी थानाध्यक्ष राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि बच्ची को अस्पताल पहुंचाकर बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किया गया है। उधर, बच्ची को एंबुलेंस से अस्पताल तक लाने वाली महिला का नाम रेशमा बानो बताया जा रहा है।
इंटरनेट मीडिया पर वीडियो में वह बच्ची को आंचल में समेटे दिख रही है। लेकिन, अस्पताल के कागजात में उसका कोई जिक्र नहीं है। बताया जाता है कि महिला बच्ची को देख कर द्रवित हो उठी थी, उसकी जान बचाने की खातिर वह बदहवास भागती रही। उसके प्रयास ने बच्ची को अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचा दिया।

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