एम्स रायबरेली में राष्ट्रीय बाल यूरोडायनेमिक्स कार्यशाला का सफल आयोजन
रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824
अत्याधुनिक वीडियो यूरोडायनेमिक्स मशीन से बच्चों में मूत्र संबंधी रोगों के सटीक निदान और किडनी की सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम
रायबरेली- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायबरेली के बाल शल्य चिकित्सा (Paediatric Surgery) विभाग द्वारा बाल मूत्रविज्ञान (Pediatric Urology) एवं वीडियो यूरोडायनेमिक्स (Video Urodynamics) विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर की हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य देशभर के बाल शल्य चिकित्सकों, यूरोलॉजिस्ट, रेज़िडेंट चिकित्सकों एवं चिकित्सा विद्यार्थियों को बच्चों में मूत्र संबंधी जटिल रोगों के आधुनिक निदान एवं उपचार संबंधी नवीनतम तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।
इस कार्यशाला में देशभर से व्यापक सहभागिता देखने को मिली। लगभग 200 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें लगभग 50 प्रतिशत प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से देश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों से जुड़े। प्रतिभागी AIIMS भुवनेश्वर, AIIMS जम्मू, AIIMS ऋषिकेश, AIIMS नागपुर, AIIMS मंगलगिरि, AIIMS बिलासपुर सहित चंडीगढ़, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पटना, रांची तथा अन्य अनेक शहरों से इस कार्यशाला में सम्मिलित हुए।
फरवरी 2026 में संस्थान में स्थापित अत्याधुनिक वीडियो यूरोडायनेमिक्स प्रयोगशाला देश के चुनिंदा अग्रणी संस्थानों में उपलब्ध है। AIIMS रायबरेली इस अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित संस्थानों की श्रेणी में शामिल होकर पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं आसपास के क्षेत्रों के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण सुपर-स्पेशियलिटी केंद्र के रूप में उभरा है।
कार्यशाला का मुख्य आकर्षण मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के प्रो. सुजॉय नियोगी द्वारा वीडियो यूरोडायनेमिक्स का लाइव हैंड्स-ऑन प्रदर्शन रहा। उन्होंने प्रतिभागियों को मशीन की कार्यप्रणाली, जांच की तकनीक, रिपोर्ट की व्याख्या तथा विभिन्न जटिल नैदानिक परिस्थितियों में इसके उपयोग का विस्तृत व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यशाला का देशभर में ऑनलाइन सीधा प्रसारण भी किया गया, जिससे विभिन्न राज्यों के विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षणरत चिकित्सक इससे लाभान्वित हुए। लाइव डेमोंस्ट्रेशन के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. अमिता जैन, कार्यकारी निदेशक ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि अत्याधुनिक तकनीकों को चिकित्सा शिक्षा एवं रोगी सेवा से जोड़ना समय की आवश्यकता है तथा AIIMS रायबरेली इस दिशा में निरंतर नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने बाल मूत्रविज्ञान जैसी सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं के विकास के लिए बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. एस. एन. कुरील ने बाल मूत्रविज्ञान के क्षेत्र में वीडियो यूरोडायनेमिक्स की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जांच बच्चों में जटिल मूत्र विकारों के सटीक निदान का स्वर्ण मानक (Gold Standard) बनती जा रही है। प्रो. दिवाकर दलेला ने आधुनिक यूरोलॉजी में वीडियो यूरोडायनेमिक्स की भूमिका, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। डीन (अकादमिक) प्रो. नीरज कुमारी ने संस्थान में बढ़ रही शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय कार्यक्रम संस्थान की अकादमिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करते हैं। इस अवसर पर उप निदेशक कर्नल अखिलेश सिंह तथा कर्नल उपेन्द्र नाथ राय भी उपस्थित रहे।
अब तक लगभग 30 बच्चों को इस सुविधा का लाभ मिल चुका है। इन बच्चों का अत्याधुनिक तकनीक द्वारा सटीक परीक्षण कर उनकी बीमारी के अनुसार उचित उपचार प्रारम्भ किया गया है। इस सुविधा के उपलब्ध होने से न केवल रोगों की सही पहचान संभव हुई है, बल्कि समय पर उपचार प्रारम्भ कर भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से भी बचाव किया जा सका है।
इनमें पद्मश्री डॉ. एस. एन. कुरील, डॉ. दिवाकर दलेला, डॉ. पूनम (कोलकाता), डॉ. प्रभु (मुंबई), डॉ. वीरेन्द्र (नई दिल्ली), डॉ. रावत एवं डॉ. अर्चिका (केजीएमयू, लखनऊ), डॉ. बसंत, डॉ. अंजू तथा डॉ. रोहित (एसजीपीजीआई, लखनऊ) और डॉ. अरविंद कंचन (AIIMS रायबरेली) शामिल रहे। इन सभी विशेषज्ञों ने अपने व्यापक नैदानिक अनुभव, उत्कृष्ट शैक्षणिक ज्ञान एवं विशेषज्ञता को प्रतिभागियों के साथ साझा किया, जिससे कार्यशाला अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं समृद्ध रही। उनकी गरिमामयी उपस्थिति, प्रेरणादायी व्याख्यानों एवं अमूल्य मार्गदर्शन ने सभी प्रतिभागियों के सीखने के अनुभव को और अधिक समृद्ध बनाया।
इस संपूर्ण कार्यशाला का नेतृत्व डॉ. सुनीता सिंह ने किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. उमेश गुप्ता, डॉ. दिव्य प्रकाश, जूनियर रेज़िडेंट डॉ. ऋषभ, डॉ. कुलसुम एवं डॉ. प्रज्ञा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नर्सिंग अधिकारियों रामाशीष, मोनिका तथा विभाग के अन्य नर्सिंग एवं तकनीकी कर्मचारियों ने भी आयोजन के सफल संचालन में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।

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